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Thursday, August 3, 2017

Anavrishti






सदियों से,
किस्सों ने , कहानियों ने,
गानों ने, दर्शाया है -
मझधार से डर, और
साहिल की चाहत,
शायद किसी ने दुआ सुन ली।
अनावृष्टि की मार में
अब नदी को देख के,
दोनों में अंतर करना मुश्किल है ।

Wednesday, April 5, 2017

Shree Ram





काँधे पर है तरकश जिनके , हाथ में कमान है ,
पितृ आदेश सर्वोपरि जिन्हें , रघुवंश अभिमान है । 
मर्यादा में जकड़े राजा , निर्णय लेके लाचार हैं  ,
सत्य के पर्यायी हैं , धर्म के आधार हैं ।
सत्ययुग में नरसिंह है तो द्वापर के घनश्याम हैं  ,
शत्रु के भी मन में रमें , ऐसे प्रभु श्री राम हैं ॥

Wednesday, February 15, 2017

कुछ मुड़े पीले पन्ने

वो काग़ज़ की नाव, आज फिर पानी पे चल गई,
वो चार आने की कंपट, आज चार आने में मिल गई,
कंचो की खन्न - खन्न से, आज फिर गलियारी खिल गई,
कुछ मुड़े पीले पन्नो को आज फिर से स्याही मिल गई ।

Sunday, January 29, 2017

निर्माण

महके इस क़दर कि गुलफ़ाम बन गए ,
बिख़रे इस क़दर कि नाकाम बन गए ,
रोटी को तरसे तो आवाम बन गए ,
अपने ही हक़ को हम हराम बन गए ।

Sunday, January 22, 2017

क़िरदार

ज़हन में यह बात नहीं रहती,
कि एक क़िरदार ही तो निभाना है,

Tuesday, January 17, 2017

परिप्रेक्ष्य

सब खेल है ये ,
परिप्रेक्ष्य का |
ये वही नमक है जो,